Skip to main content

Posts

Featured

जिंदगी में दिल v/s दिमाग

दिल तो बच्चा है जी। दिल का क्या कसूर। दिल दिया दर्द लिया। और भी हजारों अफसाने दिल के। ओह! क्या कभी सोचा है कि शायर और कवि न होते तो इस बेचारे दिल की न कोई कद्र होती न इतनी कीमत। वो कैैसे? चलिए समझते हैं जी। आपको कोई खूबसूरत व लायक लड़की पसंद आ गयी। अब वह आगे आगे और पीछे पीछे आप। फिर शुुरू होता है दिल की शायरियों और गानों का सिलसिला। क्योंकि आपका दिल उस पर आ गया है। है न यही बात। नहीं जनाब नहीं। आपका दिल नहीं "दिमाग "उस पर आ गया है। नहीं मानते आप मेरी यह बात। चलिए बताइये, आप शायरी या प्यार की कुछ भी बात दिमाग से लिखते हैं या दिल से ? अपने परिवार को प्रिय जनों को दिल से चाहते हैं या दिमाग से।  न न न आपका उत्तर दिल बिल्कुल ही गलत है।  आप कहेंगे प्यार में दिल की धड़कन बढ़ जााती है। तुम दिल की धड़कन में रहते हो रहते हो। तो सुनिए। धड़कन तो डर और गुस्से में भी बढ़ जाती है मगर इस वालीी धड़कन को शायरोों ने भाव नहीं दिया। कुल मिलाकर प्यार, भावना, धड़कन, सेक्स, क्रोध, पसंद, नापसंद आदि सभी बातें दिमाग से संबंधित है न कि दिल से। जिसे देखकर आपको प्यार आता है उसका कारण  दिमाग की मुख्य ग...

Latest Posts

जिंदगी की परिभाषा

जिंदगी क्या है? हा हा हा हा हा जनाब। शराबी जाम को परवाने शमां की ज्योत को जिंदगी कहते हैं। दुनिया नाम को तो आशिक मौत को जिंदगी कहते हैं।।। तो दोस्तों। क्या है जिंदगी आखिर ? खैर ।सुनिए कुछ हमसे भी।। जितना कि " भूख" को किसी गरीब ने देखा है। उतना ही हमने भी जिंदगी कै करीब से देखा है।।।। देखिए अपनी अपनी सोच का खेल कि जिंदगी कहां है किसमें है।।।।। मेढ़क कहे कुऐ में, मौलवी कहे जिंदगी बंदगी में है। जुआरी कहे जूए में तो सूअर कहे जिंदगी गंदगी में है।।।।। तो दोस्तों दीजिए आप भी कोई अच्छी सी परिभाषा जिंदगी को और अमल कीजिए फिर। मेरी परिभाषा भी देख लीजिए कि आखिर है क्या जिन्दगी ? अपने शरीर को स्वस्थ रखते हुए और अपने ईश्वर को धन्यवाद देते हुए सभी भौतिक साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए सामाजिक व पारिवारिक दायित्वों को निभाना ही जिंदगी है दोस्तों।।।।। भौतिक साधनों का अधिकाधिक उपयोग का अर्थ है कि खूब मस्ती और आराम से जीओ। ऐरोप्लेन में घूमिए होटलों में खाइए लोंग ड्राइव पर जाइये दुनिया के तमाम ऐशोआराम कीजिए लेकिन शरीर को स्वस्थ रखते हुए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए और परिवार के दायित्वों के दायरे में रहकर। मतलब जिंदगी जीने के लिए बेलेंस बहुत जरुरी है जी। बैलेंस के बारे में कल बात करें

जिंदगी आखिर है क्या?