जिंदगी आखिर है क्या?

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जिंदगी क्या है? हा हा हा हा हा जनाब। शराबी जाम को परवाने शमां की ज्योत को जिंदगी कहते हैं। दुनिया नाम को तो आशिक मौत को जिंदगी कहते हैं।।। तो दोस्तों। क्या है जिंदगी आखिर ? खैर ।सुनिए कुछ हमसे भी।। जितना कि " भूख" को किसी गरीब ने देखा है। उतना ही हमने भी जिंदगी कै करीब से देखा है।।।। देखिए अपनी अपनी सोच का खेल कि जिंदगी कहां है किसमें है।।।।। मेढ़क कहे कुऐ में, मौलवी कहे जिंदगी बंदगी में है। जुआरी कहे जूए में तो सूअर कहे जिंदगी गंदगी में है।।।।। तो दोस्तों दीजिए आप भी कोई अच्छी सी परिभाषा जिंदगी को और अमल कीजिए फिर। मेरी परिभाषा भी देख लीजिए कि आखिर है क्या जिन्दगी ? अपने शरीर को स्वस्थ रखते हुए और अपने ईश्वर को धन्यवाद देते हुए सभी भौतिक साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए सामाजिक व पारिवारिक दायित्वों को निभाना ही जिंदगी है दोस्तों।।।।। भौतिक साधनों का अधिकाधिक उपयोग का अर्थ है कि खूब मस्ती और आराम से जीओ। ऐरोप्लेन में घूमिए होटलों में खाइए लोंग ड्राइव पर जाइये दुनिया के तमाम ऐशोआराम कीजिए लेकिन शरीर को स्वस्थ रखते हुए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए और परिवार के दायित्वों के दायरे में रहकर। मतलब जिंदगी जीने के लिए बेलेंस बहुत जरुरी है जी। बैलेंस के बारे में कल बात करें